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2nd October ; अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों में दंडमुक्ति समाप्त करने का दिवस

International Day to End Impunity for Crimes Against Journalists

JHVP BHARAT NEWS
EDITOR : PARWEZ ALAM
SIWAN (BIHAR) : पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों पर दण्डमुक्ति समाप्त करने का अंतरराष्ट्रीय दिवस

सच उजागर करने की कीमत आखिर कितनी जानों से चुकानी होगी? पत्रकारों की सुरक्षा ही लोकतंत्र की सुरक्षा है।
समाचार संकलन, सच्चाई की खोज और आम लोगों तक वास्तविक जानकारी पहुँचाने के दौरान दुनिया के विभिन्न हिस्सों में पत्रकारों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (Committee to Protect Journalists) के आँकड़ों के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में दुनिया भर में लगभग 2,000 पत्रकारों की हत्या की जा चुकी है। इराक, सीरिया, अफगानिस्तान, मैक्सिको, फिलीपींस, पाकिस्तान, सोमालिया, यूक्रेन और भारत में अनेक पत्रकारों की हत्या हुई है। इनमें से अधिकांश मामलों में आज भी न्याय मिलना बाकी है।

हर वर्ष 2 नवंबर को ‘International Day to End Impunity for Crimes Against Journalists’ अर्थात ‘पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों पर दण्डमुक्ति समाप्त करने का अंतरराष्ट्रीय दिवस’ मनाया जाता है। वर्ष 2013 में संयुक्त राष्ट्र ने इस दिवस की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य पत्रकारों के विरुद्ध होने वाले अपराधों के मामलों में दण्डमुक्ति और न्यायहीनता की स्थिति समाप्त करना है।


यूनेस्को के आँकड़ों के अनुसार, पत्रकारों की हत्या के लगभग सात में से छह मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के तहत दोषियों को सजा नहीं मिल पाती। डिजिटल दुनिया में भी विशेष रूप से महिला पत्रकारों को ऑनलाइन उत्पीड़न, धमकियों और चरित्रहनन जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
कई देशों में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्थाएँ लागू हैं। मैक्सिको में पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के लिए संघीय सुरक्षा व्यवस्था, कोलंबिया में जोखिम का सामना कर रहे पत्रकारों के लिए सुरक्षा कार्यक्रम, नॉर्वे और स्वीडन में सूचना के अधिकार तथा कार्यस्थल की सुरक्षा से संबंधित मजबूत कानून और यूरोपीय संघ में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए विशेष नीतियाँ लागू हैं।

भारत में प्रेस काउंसिल, सूचना का अधिकार कानून और विभिन्न राज्यों की सुरक्षा संबंधी पहल मौजूद होने के बावजूद पत्रकारों की हत्या के मामलों में त्वरित जाँच, गवाहों की सुरक्षा और राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी सुरक्षा कानूनों की व्यवस्था अभी भी अपर्याप्त है। जागरूकता बढ़ने के बावजूद इनके व्यावहारिक क्रियान्वयन में काफी कमी है।
पत्रकारों की सुरक्षा ही लोकतंत्र की सुरक्षा है। पत्रकारों पर होने वाले प्रत्येक हमले की निष्पक्ष जाँच, त्वरित न्याय और पेशेगत स्वतंत्रता सुनिश्चित करना राज्य का दायित्व है। सच को सामने लाने के अधिकार की रक्षा हो—यही 2 नवंबर का संकल्प होना चाहिए।

पत्रकारों की सुरक्षा लोकतंत्र की सुरक्षा है: अपराधियों को सजा मिले, तभी सच की आवाज़ बुलंद होगी

हर वर्ष 2 नवंबर को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों में दंडमुक्ति समाप्त करने का दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन पत्रकारों को याद करने का अवसर है, जिन्होंने सच्चाई सामने लाने, भ्रष्टाचार उजागर करने, मानवाधिकारों की रक्षा करने और समाज को जागरूक बनाने के लिए अपनी जान तक गंवा दी।

पत्रकारिता केवल समाचार प्रकाशित करने या प्रसारित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। पत्रकार समाज की समस्याओं, सरकारी नीतियों, भ्रष्टाचार, अन्याय और आम जनता की आवाज़ को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का काम करते हैं। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि आज भी दुनिया के अनेक देशों में पत्रकारों को धमकियों, हमलों, झूठे मुकदमों, अपहरण और हत्या जैसी गंभीर घटनाओं का सामना करना पड़ता है।

जब किसी पत्रकार पर हमला होता है, तो वास्तव में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनता के जानने के अधिकार पर हमला होता है।

दंडमुक्ति की समस्या: अपराधियों को संरक्षण क्यों?

दंडमुक्ति का अर्थ है कि किसी अपराध के जिम्मेदार व्यक्ति को उसके अपराध के बावजूद कानूनी सजा न मिलना। जब पत्रकारों की हत्या, उन पर हमले या उन्हें धमकाने वाले लोगों के खिलाफ निष्पक्ष जांच नहीं होती और दोषियों को सजा नहीं मिलती, तो अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं।

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की 2 नवंबर 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 और 2025 के दौरान दुनिया भर में 189 पत्रकारों की हत्या हुई। इनमें से लगभग 86 प्रतिशत मामलों में न्यायिक प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है या मामले अनसुलझे हैं। यह आंकड़ा पूरी दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

भारत में पत्रकारों की सुरक्षा भी एक बड़ा सवाल

भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में पत्रकारिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। गांव से लेकर शहर तक पत्रकार जनता की समस्याओं, सरकारी योजनाओं, भ्रष्टाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों को सामने लाते हैं।

विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में काम करने वाले पत्रकारों के सामने कई चुनौतियां होती हैं। स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार या अनियमितताओं को उजागर करने पर उन्हें दबाव, धमकी, सामाजिक विरोध और कभी-कभी हिंसा का सामना करना पड़ सकता है।

पत्रकार चाहे किसी बड़े राष्ट्रीय मीडिया संस्थान से जुड़ा हो या किसी छोटे डिजिटल न्यूज़ पोर्टल से, उसकी सुरक्षा और सम्मान समान रूप से महत्वपूर्ण होना चाहिए।

पत्रकारिता के नाम पर किसी को कानून से ऊपर होने का अधिकार नहीं है, लेकिन पत्रकारिता करने वाले व्यक्ति को भी निष्पक्ष रिपोर्टिंग के कारण प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए।

डिजिटल युग में महिला पत्रकारों के सामने नई चुनौतियां

आज सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया ने पत्रकारिता को नई पहचान दी है। लेकिन इसके साथ ही पत्रकारों, विशेषकर महिला पत्रकारों के खिलाफ ऑनलाइन उत्पीड़न, अश्लील टिप्पणियां, धमकियां, फर्जी तस्वीरें, डीपफेक और चरित्र हनन जैसी घटनाएं भी बढ़ती चिंता का विषय हैं।

UNESCO ने वर्ष 2026 में पत्रकारों की सुरक्षा के मुद्दे पर विशेष रूप से नई तकनीकों, डिजिटल हमलों और युद्ध क्षेत्रों में पत्रकारों के सामने आने वाले खतरों को रेखांकित किया है।

ऐसी घटनाओं पर प्रभावी कानूनी कार्रवाई और डिजिटल सुरक्षा के मजबूत उपाय जरूरी हैं।

पत्रकारों की सुरक्षा के लिए सरकार और समाज की जिम्मेदारी

पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों को समाप्त करने के लिए केवल अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

  1. पत्रकारों पर होने वाले हमलों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होनी चाहिए।

  2. पत्रकारों को धमकी देने और उन पर हमला करने वाले दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए।

  3. पत्रकारों को बिना डर और दबाव के स्वतंत्र रूप से काम करने का वातावरण मिलना चाहिए।

  4. महिला पत्रकारों के खिलाफ ऑनलाइन और ऑफलाइन उत्पीड़न पर प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।

  5. ग्रामीण, स्थानीय और स्वतंत्र डिजिटल मीडिया के पत्रकारों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

  6. पत्रकारिता संस्थानों को भी अपने पत्रकारों की सुरक्षा, प्रशिक्षण और कानूनी सहायता की व्यवस्था करनी चाहिए।

  7. पत्रकारों को भी निष्पक्षता, तथ्यात्मक रिपोर्टिंग, जिम्मेदारी और पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों का पालन करना चाहिए।

पत्रकारिता की स्वतंत्रता ही मजबूत लोकतंत्र की पहचान

लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना, जनता की समस्याओं को उजागर करना और व्यवस्था की कमियों पर चर्चा करना पत्रकारिता का महत्वपूर्ण दायित्व है। यदि पत्रकार डर के माहौल में काम करेंगे, तो समाज तक सही और निष्पक्ष जानकारी पहुंचाना कठिन हो जाएगा।

एक स्वतंत्र पत्रकारिता व्यवस्था ही जनता को जागरूक बनाती है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को जवाबदेह रखने में सहायता करती है।

यह भी जरूरी है कि पत्रकारिता के नाम पर गलत सूचना, अफवाह, झूठी खबर और किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री को बढ़ावा न दिया जाए। स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी पत्रकारिता का अनिवार्य हिस्सा है।

निष्कर्ष: सच लिखने वालों को सुरक्षा मिले, न्याय में देरी न हो

अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों में दंडमुक्ति समाप्त करने का दिवस हमें यह संदेश देता है कि सच्चाई की आवाज को दबाने वालों को किसी भी परिस्थिति में संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।

पत्रकारों की हत्या, धमकी, उत्पीड़न और हिंसा के मामलों में न्याय मिलना केवल पीड़ित पत्रकार और उसके परिवार का अधिकार नहीं, बल्कि पूरे समाज की आवश्यकता है।

आज जरूरत है कि सरकारें, न्यायपालिका, प्रशासन, मीडिया संस्थान और नागरिक समाज मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाएं, जिसमें कोई भी पत्रकार सच लिखने या जनता की आवाज उठाने के कारण भयभीत न हो।

याद रखिए, पत्रकार सुरक्षित रहेंगे तो लोकतंत्र मजबूत रहेगा। पत्रकारों की आवाज दबेगी तो जनता के अधिकार भी कमजोर होंगे।

आइए, इस अंतरराष्ट्रीय दिवस पर हम संकल्प लें कि पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान, स्वतंत्रता और न्याय के लिए हमेशा आवाज उठाएंगे।

सच की आवाज को न दबने दें, पत्रकारों को सुरक्षित रखें और अपराधियों को सजा दिलाएं।

प्रस्तुति: JHVP BHARAT NEWS

संपादक: परवेज़ आलम

संदेश: पत्रकारों का सम्मान करें, पत्रकारिता की स्वतंत्रता की रक्षा करें। सबका सम्मान, सबका अधिकार।

 

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Socio Economic Educational and Political Activist.... 9931481554 jhvpbharatnews@gmail.com

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